"गमेदिल"

मेरा दिल कहता है...

10 Posts

127 comments

Manish Singh "गमेदिल"


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

“सुल्तान”

Posted On: 21 Jan, 2011  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

19 Comments

“प्रेम की परिभाषा”

Posted On: 2 Sep, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी लोकल टिकेट में

12 Comments

“इंसान”

Posted On: 2 Sep, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

8 Comments

“गम”

Posted On: 1 Sep, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.43 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

4 Comments

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Manish Singh "गमेदिल" Manish Singh "गमेदिल"

के द्वारा: Moni Moni

के द्वारा: Manish Singh "गमेदिल" Manish Singh "गमेदिल"

के द्वारा: Manish Singh "गमेदिल" Manish Singh "गमेदिल"

नंदा दीप जलाना होगा| अंध तमस फिर से मंडराया, मेधा पर संकट है छाया| फटी जेब और हाँथ है खाली, बोलो कैसे मने दिवाली ? कोई देव नहीं आएगा, अब खुद ही तुल जाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा|| केहरी के गह्वर में गर्जन, अरि-ललकार सुनी कितने जन? भेंड, भेड़िया बनकर आया, जिसका खाया,उसका गाया| मात्स्य-न्याय फिर से प्रचलन में, यह दुश्चक्र मिटाना होगा| नंदा-दीप जलाना होगा| नयनों से भी नहीं दीखता, जो हँसता था आज चीखता| घरियालों के नेत्र ताकते, कई शतक हम रहे झांकते| रक्त हुआ ठंडा या बंजर भूमि, नहीं, गरमाना होगा| नंदा दीप जलाना होगा ||..................................मनोज कुमार सिंह ''मयंक'' प्रिय गमेदिल जी, आपको और आपके सारे परिवार को ज्योति पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं || वन्देमातरम

के द्वारा: atharvavedamanoj atharvavedamanoj

प्रिय बंधू मनीष जी.......... आपके सवाल भीतर तक चोट करते हैं........... जैसा की आपने प्रश्न किया है की क्या आपके भाई की विधवा को उसी घर में रहकर अपने ससुर, ननद और देवर का ख्याल रखना चाहिए। क्या यह उचित होगा? हम एक बार दीपक से साथ अन्याय कर चुके हैं क्या हमे अपनी गलतियों की पुनरावृति कर लेनी चाहिए? मुझे नहीं लगता की कोई इस प्रश्न के उत्तर में हाँ कहेगा..........अगर शादी होने की उम्र में कोई विधवा हो जाये और हम कहें उसको यूँ ही जीना होगा.......... तो हम हमे अपने को इंसान कहने का अधिकार नहीं........... वास्तव में जो लोग इस पर समर्थन दें की उसको वहीँ रह कर ससुर ननद और देवर का ख्याल रखना चाहिए ............. समझ लें की ये वे लोग हैं जो कहते हैं की कन्या भ्रूण हत्या पाप है.......... और मंदिर में प्रार्थना करते हों की मेरे घर बेटी न पैदा हो............ हमें उन माता पिता के सम्बन्ध में भी सोचना चाहिए जिनकी वो बेटी है................ अन्दर तक चोट की है इस घटना ने....... अब कुछ लिख पाने के सक्षम नहीं हूँ...........

के द्वारा: पियूष पन्त , हल्द्वानी पियूष पन्त , हल्द्वानी

आदरणीय शाही जी प्रणाम, मुझे आप जैसे वरिष्ठों का ही तो आशीर्वाद चाहिए ताकि मैं दीपक के लिए कुछ कर सकूँ। दीपक की मौत का मैं ब्लॉग पे खुलासा नहीं करना चाहता था। क्यूंकि दीपक रोज रोज की कलह से पीडित था, वह अपनी पत्नी तथा अपनी दादी जी के मध्य होने वाले झगडे से परेशान था और उस पर मेरे फूफा जी (दीपक के पिता) का अपनी माँ का साथ देना। दीपक कई बार मुझ से आत्महत्या की बात कह चुका था। बताना चाहूँगा दीपक वर्ष के ३ से ४ महीने मेरे ही पास अपनी पदाई के लिए रहता था। इसलिए जितना करीब से मैं दीपक को जानता था शायद कोई नहीं। मैं हमेशा उसकी हौसलाफजाई करता रहता था। पर... शाही जी मैं इस घटना को ब्लॉग पर नहीं लाना चाहता था, पर क्या करूँ मेरे विचारों के विरोध में जब मैंने सवयं अपने ही घर वालों को पाया। तो मैं विचलित हो गया और अपने आपको अकेला पाकर कही मैं कमजोर न पड़ जाऊ इसी लिए... मैं इसे ब्लॉग पे ले आया। मैं उचित समय की प्रतीक्षा में हूँ जब सवयं बहू से इस बारे मैं बात करूँ। क्यूँ की कुछ करने से पहले मुझे उसकी भी राय जानना ज़रूरी है। आपका मनीष सिंह

के द्वारा: मनीष सिंह मनीष सिंह

मनीष जी आपके भाई दीपक की अकाल मृत्यु हम सभी को झटका देने वाली है । बहुत दुख हुआ जानकर । आपने विवरण तो नहीं दिया है कि कैसे मृत्यु हुई, परन्तु परिस्थितियां बता रही हैं कि बेचारा नौजवान ज़िम्मेदारियों से अपना पल्ला झाड़ने वाले नजदीकी रिश्तेदारों के कुचक्र का शिकार होकर विवाह कर बैठा, और मृत्यु के पीछे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से यह परिस्थितियां भी निश्चय ही कारकों में होंगी । अब उस बच्ची के कठोर वैधव्य की दारुण पीड़ा से उसको निज़ात दिलाकर पुनर्विवाह कराने के लिये आप और आपके समाज के नौजवानों को आगे आना होगा, और कोई उपाय नहीं है । यदि आप नौजवान हम बूढ़े हो चले लोगों का अगुआई के लिये मुंह देखेंगे, तो बड़ा अनर्थ हो जाएगा । पुरातनपंथी खूसट सिर्फ़ समस्याएं पैदा करेंगे, उनके खोखले ईगो आड़े आएंगे, और ये क्षमताविहीन लोग उस बच्ची का जीवन नर्क़ बना देंगे । अब आपको सोचना है कि यहां ब्लाग पर इस मसले को लेकर बेकार की बहस करानी है, या उस बच्ची का उद्धार करना है । बड़ी-बड़ी बातें करने का नहीं, कुछ करने का समय है, और जैसे ही दीपक के कारण बने ज़ख्म थोड़े सूखने लगें, आप और आपके साथियों को आगे बढ़कर जंज़ीरें तोड़ देनी हैं । उसकी बच्ची के भविष्य और लालन पालन पर खूब समझते हुए रिश्ता करना है । बाक़ी यदि डिस्कस करना है तो मेल से अवश्य बात करें । साधुवाद ।

के द्वारा: आर. एन. शाही आर. एन. शाही




latest from jagran